देव शिला पर अर्धरात्रि छलांग
भूरेश्वर महादेव का सबसे विस्मयकारी और जोखिम भरा अनुष्ठान 'देव ग्यास' और 'देव शयनी' की पवित्र रातों के दौरान होता है। आधी रात के घोर अंधकार में, देवता की अलौकिक शक्ति से पूर्णतः आविष्ट (प्रवेश) मुख्य पुजारी "देव शिला" (ताण्डव शिला) पर एक चमत्कारिक छलांग लगाते हैं। यह शिला मुख्य शिवलिंग के ठीक पीछे 6,800 फुट गहरी खाई के ऊपर खतरनाक रूप से स्थित है। इस खतरनाक चट्टान पर नंगे पैर खड़े होकर देवता भक्तों और अपनी प्रजा को आशीर्वाद देते हैं। यह गहन अनुष्ठान उस प्राचीन ऐतिहासिक घटना की पुनरावृत्ति है, जिसे सिरमौर के राजा ब्रह्म प्रकाश ने देखा था, जब देव-आविष्ट पुजारी ने इसी शिला पर दूध की धार अर्पित की थी।