स्वयंभू भू लिंग, क्वागधार
भूरेश्वर महादेव मंदिर की सबसे महान और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण धरोहर स्वयं 'स्वयंभू' (स्वतः प्रकट) भू लिंग है। क्वागधार की ऊँची चोटी पर स्थित, यह आदिकालीन काले रंग का लिंगाकार पत्थर पर्वत के अंदर लगभग 25 से 30 फुट की गहराई में एक 'शिला विशेष' के साथ अनूठे रूप से विराजमान है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, यह दिव्य लिंग सृष्टि के आरंभ काल से ही यहाँ स्थित है और इसका निर्माण किसी भी व्यक्ति द्वारा नहीं किया गया है, जो इसके आदिकालीन होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
स्थानीय गाथाओं में इसे महाभारत काल से बहुत ही सुंदरता से जोड़ा गया है, जिसके अनुसार भगवान शिव ने कुरुक्षेत्र का युद्ध देखने के लिए यहाँ देवत्व रूप धारण किया था। चूँकि महादेव की छाया इस लिंग में प्रविष्ट हुई थी, इसलिए इन्हें "भूरेश्वर महादेव" कहा गया। आज भी, प्रकृति द्वारा निर्मित यह अद्भुत स्वरूप प्राचीन भक्ति का सर्वोच्च प्रतीक है, जिसकी पूजा और दर्शन अत्यंत विशेष देव-परंपराओं (देवलिंग विधान) के माध्यम से ही संभव हो पाते हैं।