स्थान
भूरेश्वर महादेव मंदिर, क्वागधार, सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
मंदिर की आधिकारिक स्तुति
भूरेश्वर महादेव की यह आधिकारिक आरती केवल एक वंदना नहीं है, बल्कि मंदिर के संपूर्ण इतिहास और अलौकिक परंपराओं का एक काव्यात्मक दर्पण है। छह अद्भुत छंदों में रचित यह आरती भगवान शिव को 'दुग्धाहारी' के रूप में महिमामंडित करती है, विकट शिला पर उनके अर्धरात्रि खेल (छलांग) का सजीव वर्णन करती है, और सप्तदुग्ध धारा से लेकर द्वापर युग में यहाँ से महाभारत युद्ध देखे जाने के ऐतिहासिक प्रसंग को संजोए हुए है। इस दिव्य स्तुति का गान भक्तों को क्वागधार की प्राचीन और रहस्यमयी ऊर्जा से सीधे जोड़ता है।
जय दुग्धाहारी भोले जय दुग्धहारी,
जन जन तुमको ध्यावे महिमा अतिभारी जय... 1
दूध ही तुमको भाता, चंवर त्रिशूल धारी । भोले चॅवर.....
विकट शिला पर खेलें, श्वेत वस्त्रधारी । जय..2
तुंगनाथ, केदारनाथ को नमन अमरधार को नमामि । भोले अमर....
जो चढ़ती सातों धारें, जात्रा अति न्यारी । जय.....3
जब तुम शिला पर जाते, कांपते नर नारी । भोले कांपते नर.....
निर्भय करते सबको, सब करते जय जयकारी। जय.... 4
जो सात वचन तुम कहते, सबके मनोहारी । भोले सबके......
सुत धन सुख के दाता, रहती खुशहाली। जय...5
भूरेश्वर कोई भूरिश्रृंग कहते, वेदों में महिमा तुम्हारी । भोले
द्वापर रण यहा से देखा, कुलदेव बने प्रजा के सारी। जय... 6
बहन-भाई को मिलाकर, बने करुणाकारी। भोले......
हम पर दया करो प्रभु, बनकर हितकारी। जय
भूरेश्वर महादेव मंदिर, क्वागधार, सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
मंदिर सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है।
निर्धारित क्षेत्रों में ही फोटोग्राफी की अनुमति है।
कृपया शांति बनाए रखें और इस स्थान की पवित्रता का सम्मान करें।